हैदराबाद:
हैदराबाद का प्रसिद्ध नेहरू जूलॉजिकल पार्क एक बार फिर वन्यजीव संरक्षण और अंतर-चिड़ियाघर सहयोग के क्षेत्र में अहम पहल करने जा रहा है। अनंत अंबानी के महत्वाकांक्षी वन्यजीव संरक्षण प्रोजेक्ट vantara zoo से कंगारू का एक जोड़ा जल्द ही हैदराबाद चिड़ियाघर पहुंचेगा। यह आदान-प्रदान एनिमल एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य दुर्लभ और विदेशी प्रजातियों का संरक्षण, प्रजनन और जैव विविधता को बढ़ावा देना है।
नेहरू जूलॉजिकल पार्क के जनसंपर्क अधिकारी (PRO) हनीफुल्ला के अनुसार, कंगारू का यह जोड़ा—जिसमें एक नर और एक मादा शामिल हैं—अगले सप्ताह तक हैदराबाद पहुंचने की पूरी संभावना है। उन्होंने बताया कि कंगारू के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया गया बाड़ा वर्ष 2020 से ही तैयार है, ताकि जानवरों को यहां आने के बाद किसी तरह की असुविधा न हो।
हाथी के बदले कंगारू: कैसे होगा एक्सचेंज
इस एनिमल एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत हैदराबाद चिड़ियाघर की ओर से vantara zoo को एक हाथी दिया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, इस तरह के एक्सचेंज कार्यक्रम चिड़ियाघरों के बीच संतुलन बनाए रखने, आनुवंशिक विविधता सुधारने और जानवरों के बेहतर स्वास्थ्य व प्रजनन के लिए बेहद जरूरी माने जाते हैं।
यह पहली बार नहीं है जब हैदराबाद चिड़ियाघर इस तरह के अंतर-चिड़ियाघर आदान-प्रदान का हिस्सा बना हो। इसी साल अक्टूबर में एक बड़े एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत, करीब 30 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद दो नर और एक मादा ज़ेबरा को हैदराबाद लाया गया था। इसके बदले में 20 माउस हिरणों को vantara zoo भेजा गया था। उस समय इस कदम को वन्यजीव प्रेमियों और संरक्षण विशेषज्ञों ने काफी सराहा था।
कंगारू के साथ और भी मेहमान
केवल कंगारू ही नहीं, बल्कि आने वाले दिनों में नेहरू जूलॉजिकल पार्क में अन्य आकर्षक वन्यजीव भी देखने को मिलेंगे। PRO हनीफुल्ला के अनुसार, कंगारू के जोड़े के साथ-साथ वॉलबी (Wallaby) का एक जोड़ा भी चिड़ियाघर लाया जाएगा। इसके अलावा, एक मादा जिराफ़ भी जल्द ही हैदराबाद पहुंचेगी।
उन्होंने बताया कि यह मादा जिराफ़ कर्नाटक के मैसूर चिड़ियाघर से लाई जा रही है, ताकि हैदराबाद चिड़ियाघर में पहले से मौजूद नर जिराफ़ ‘सनी’ को संग मिल सके। इससे जिराफ़ प्रजाति के सफल प्रजनन की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।
देशभर के चिड़ियाघरों से सहयोग
हैदराबाद चिड़ियाघर ने केवल vantara zoo ही नहीं, बल्कि देश के कई अन्य जूलॉजिकल पार्कों के साथ भी एनिमल एक्सचेंज प्रोग्राम प्रस्तावित किए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, इनमें से कुछ कार्यक्रम पहले ही पूरे हो चुके हैं, जबकि कुछ को अभी सेंट्रल ज़ू अथॉरिटी (CZA) से अंतिम मंजूरी मिलना बाकी है।
चिड़ियाघर प्रशासन का मानना है कि इस तरह के सहयोगात्मक प्रयास न सिर्फ जानवरों के संरक्षण में मदद करते हैं, बल्कि आगंतुकों को भी नई और दुर्लभ प्रजातियां देखने का अवसर प्रदान करते हैं।
380 एकड़ में फैला जैव विविधता का केंद्र
नेहरू जूलॉजिकल पार्क लगभग 380 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है और यह भारत के सबसे बड़े और सबसे समृद्ध चिड़ियाघरों में गिना जाता है। यहां पक्षियों, जानवरों और सरीसृपों की लगभग 100 प्रजातियां मौजूद हैं। इनमें कई स्वदेशी और दुर्लभ प्रजातियां शामिल हैं, जैसे भारतीय गैंडा, एशियाई शेर, बंगाल टाइगर, पैंथर, गौर, भारतीय हाथी, स्लेंडर लोरिस और अजगर।
इसके अलावा, यहां विभिन्न प्रजातियों के हिरण, मृग और रंग-बिरंगे पक्षी भी देखे जा सकते हैं, जो चिड़ियाघर को प्रकृति प्रेमियों के लिए खास बनाते हैं।
मीर आलम टैंक बना अतिरिक्त आकर्षण
यह चिड़ियाघर मीर आलम टैंक के पास स्थित है, जो सैकड़ों प्रवासी पक्षियों को आकर्षित करता है। सर्दियों के मौसम में यहां दूर-दराज़ के देशों से आए पक्षियों को देखना पर्यटकों के लिए एक अलग ही अनुभव होता है। यह प्राकृतिक जलाशय चिड़ियाघर की सुंदरता और जैव विविधता में चार चांद लगाता है।
वन्यजीव संरक्षण की दिशा में अहम पहल
अनंत अंबानी का vantara zoo देश और दुनिया में वन्यजीव संरक्षण के लिए एक बड़े और गंभीर प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। हैदराबाद चिड़ियाघर के साथ किया जा रहा यह एनिमल एक्सचेंज प्रोग्राम इस बात का उदाहरण है कि कैसे निजी और सरकारी संस्थान मिलकर जैव विविधता को संरक्षित करने की दिशा में काम कर सकते हैं।
कंगारू, वॉलबी और जिराफ़ जैसे नए मेहमानों के आगमन से न केवल हैदराबाद चिड़ियाघर की आकर्षण क्षमता बढ़ेगी, बल्कि यह कदम वन्यजीव संरक्षण, शोध और शिक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण साबित होगा। आने वाले समय में यह चिड़ियाघर देश के प्रमुख वन्यजीव केंद्रों में अपनी पहचान और मजबूत करने की ओर अग्रसर दिख रहा है।

