गोवा और महाराष्ट्र के वन विभागों ने एक ऐसे जंगली हाथी को काबू में करने और स्थानांतरित करने की तैयारी तेज कर दी है, जिसने पिछले चार महीनों से दोनों राज्यों में लगातार नुकसान पहुंचाया है। अधिकारियों के अनुसार, 10 वर्षीय इस नर हाथी ओंकार को पकड़कर गुजरात स्थित प्रसिद्ध बचाव और पुनर्वास केंद्र vantara भेजने की योजना पर तेजी से काम किया जा रहा है, क्योंकि न तो गोवा और न ही महाराष्ट्र के पास ऐसे मामलों को संभालने के लिए कोई विशेष सुविधा उपलब्ध है।
ओंकार 30 नवंबर को अचानक फिर से गोवा में दिखाई दिया, जबकि पिछले तीन महीनों से उसकी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल रही थी। सबसे पहले उसे परनेम के फकीरपाडा इलाके में देखा गया, जिसके बाद यह पुष्टि हो गई कि वह एक बार फिर गोवा की ओर लौट आया है। अगले ही दिन वह टोरसेम पहुंच गया, जहां खेतों और बागानों को नुकसान पहुंचाए जाने की शिकायतें सामने आईं। वर्तमान में वह मोपा–उगवेम–निगल्ये–पोर्सकाडेम क्षेत्र में घूम रहा है और केले की खेती के साथ कुछ वाहनों को भी क्षति पहुंचाने की खबरें मिली हैं।
लगातार निगरानी में वन विभाग
वन अधिकारियों ने बताया कि ओंकार को सितंबर की शुरुआत में आखिरी बार देखा गया था, जिसके बाद वह गोवा–महाराष्ट्र सीमा के घने जंगलों में चला गया था। उसके दोबारा लौटने के बाद विभाग ने ग्राउंड स्टाफ, रेस्क्यू टीमों और ड्रोन यूनिट को तैनात किया है, जो उसकी गतिविधियों की चौबीसों घंटे निगरानी कर रहे हैं।
अधिकारी ने कहा, “टीमें लगातार उसके मूवमेंट की मॉनिटरिंग कर रही हैं। ड्रोन से उसकी दिशा और जिन जगहों पर वह भोजन खोजने रुकता है, उनका पता लगाने में काफी मदद मिली है।” उन्होंने ग्रामीणों को चेतावनी दी है कि वे हाथी के पास न जाएं और किसी भी प्रकार की गतिविधि तुरंत विभाग को सूचित करें।
ग्रामीण क्षेत्रों में वह नारियल, सुपारी और केले जैसी आसानी से मिलने वाली फसलों पर निर्भर होकर आगे बढ़ रहा है, जिससे खेतों को भारी नुकसान हो रहा है।
क्यों चुना गया Vantara?
ओंकार को vantara भेजने का निर्णय इस वजह से लिया गया है कि दोनों राज्यों में हाथियों की दीर्घकालिक देखभाल या पुनर्वास के लिए कोई विशेष केंद्र मौजूद नहीं है। महाराष्ट्र वन विभाग ने हाथी को पकड़ने की योजना तैयार कर ली है और इसके लिए बॉम्बे हाई कोर्ट से अनुमोदन भी प्राप्त कर लिया है।
गुजरात के जामनगर में स्थित vantara, राधे कृष्णा टेम्पल एलिफेंट वेलफेयर ट्रस्ट (RKTWET) द्वारा संचालित एक आधुनिक और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने वाला हाथी संरक्षण केंद्र है। यहां उन्नत पशु-चिकित्सा सुविधाएं, विशाल प्राकृतिक बाड़े, हाइड्रोथेरेपी, प्रशिक्षण एरिना और दीर्घकालिक पुनर्वास व्यवस्था उपलब्ध है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “गोवा और महाराष्ट्र दोनों के पास कोई विशेष पुनर्वास सुविधा नहीं है, इसलिए महाराष्ट्र सरकार ने औपचारिक रूप से vantara से सहायता मांगी है। यह केंद्र ओंकार जैसे हाथी के लिए सबसे उपयुक्त है, जो बार-बार बस्तियों में घुस आता है।”
हाई कोर्ट की अनुमति से योजना को मिली मजबूती
पिछले महीने बॉम्बे हाई कोर्ट की कोल्हापुर बेंच ने 10 वर्षीय जंगली हाथी को पकड़ने की अनुमति देते हुए स्पष्ट निर्देश दिए थे कि पूरी प्रक्रिया में पशु को तनाव या चोट नहीं पहुंचनी चाहिए। अदालत ने यह भी कहा कि ओंकार को vantara में स्थानांतरित करने के बाद उसकी देखभाल और प्रशिक्षण वहीं की विशेषज्ञ टीम की निगरानी में होगा।
हाथी को पकड़ने का ऑपरेशन अनुभवी पशु-चिकित्सकों, प्रशिक्षित महावतों और स्पेशल कैप्चर टीमों की मदद से किया जाएगा, जिसमें ट्रैंक्विलाइज़िंग और सुरक्षित परिवहन के विशेष प्रोटोकॉल का पालन किया जाएगा।
ग्रामीणों को उम्मीद, विभाग ने रखी संयम की अपील
गोवा और महाराष्ट्र के ग्रामीण इलाकों में ओंकार की बढ़ती मौजूदगी से लोग डरे हुए हैं, क्योंकि बड़े पैमाने पर फसलें बर्बाद हो रही हैं। हालांकि अब तक कोई मानव हानि नहीं हुई है, लेकिन विभाग का मानना है कि स्थिति जितनी लंबी खिंचेगी, जोखिम उतना बढ़ेगा।
ग्रामीणों से धैर्य रखने और वन विभाग के निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है। उच्च जोखिम वाले इलाकों में टीमें तैनात की गई हैं और गांवों में जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं।
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जल्द हो सकता है स्थानांतरण
हालांकि vantara को चुना जाना लगभग तय माना जा रहा है, लेकिन अधिकारी अब भी यह तय कर रहे हैं कि हाथी को पकड़ने का सबसे सुरक्षित समय कौन-सा होगा।
“हमारा लक्ष्य है कि ऑपरेशन के दौरान हाथी को किसी तरह की घबराहट या तकलीफ न हो,” एक अधिकारी ने कहा। “हम उसकी दैनिक गतिविधियों और रूट पैटर्न पर करीबी नजर रख रहे हैं।”
यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो आने वाले दिनों में ओंकार को सुरक्षित रूप से पकड़कर vantara भेजा जा सकता है, जहां उसका लम्बे समय तक संरक्षण और देखभाल सुनिश्चित होगी।

