CITES ने Vantara की पारदर्शिता, आधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर और पशु कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता को माना मिसाल
भारत की पशु संरक्षण और कल्याण पहल Vantara को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी सराहना मिली है।
अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव व्यापार की निगरानी करने वाली संस्था CITES (Convention on International Trade in Endangered Species of Wild Fauna and Flora) ने अपनी हालिया रिपोर्ट में कहा कि Vantara की सुविधाएं “असाधारण रूप से उच्च मानकों के अनुसार संचालित होती हैं” और इनमें “आधुनिक एनक्लोज़र, पशु चिकित्सा देखभाल और उन्नत संरचनाएं” शामिल हैं।
CITES सचिवालय की इस रिपोर्ट में कहा गया कि उन्हें “ऐसा कोई कारण नहीं मिला जिससे यह संदेह हो कि ये सुविधाएं पशुओं को उचित रूप से रखने और देखभाल करने में सक्षम नहीं हैं।” रिपोर्ट में यह भी जोड़ा गया कि Vantara में विकसित की गई उन्नत पशु चिकित्सा तकनीकें और उपचार संबंधी उपलब्धियां वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय के साथ साझा की जानी चाहिए।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की सराहना
CITES के इस मिशन-विजिट ने यह सिद्ध किया है कि Vantara जैसी निजी संरक्षण परियोजनाएं भी अंतरराष्ट्रीय स्तर के नियमों और प्रोटोकॉल का पालन कर सकती हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, यह पहल CITES कन्वेंशन के अनुच्छेद III में निर्धारित मापदंडों पर खरी उतरती है, जो उन प्रजातियों पर लागू होता है जो Appendix I की सूची में आती हैं-यानी सबसे अधिक संरक्षित श्रेणी।
संगठन ने कहा कि Vantara ने “पशु चिकित्सा क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति” हासिल की है और इसके चिकित्सक “आधुनिक तकनीकों का सफल उपयोग कर रहे हैं।” इस उपलब्धि को अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक मंचों पर साझा करने की सिफारिश भी की गई है।
कानूनी पारदर्शिता और सुप्रीम कोर्ट की पुष्टि
CITES रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया कि भारत में Vantara से जुड़ी किसी भी इकाई द्वारा “CITES परमिट के बिना किसी भी पशु का आयात” नहीं किया गया है और “किसी भी पशु का आयात व्यावसायिक उपयोग के उद्देश्य से नहीं हुआ है।”
संगठन ने भारतीय प्राधिकरणों और Vantara प्रबंधन की पारदर्शिता, रिकॉर्ड प्रबंधन और नियामकीय अनुपालन की भी सराहना की। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि भारत और संस्था दोनों आगे और अधिक पारदर्शिता तथा डेटा साझा करने की दिशा में काम करने को तैयार हैं।
भारत के सुप्रीम कोर्ट ने भी 15 सितंबर 2025 को एक अहम आदेश में पुष्टि की कि Greens Zoological Rescue and Rehabilitation Centre (GZRRC) और Radha Krishna Temple Elephant Welfare Trust (RKTEWT) द्वारा की गई सभी पशु अधिग्रहण गतिविधियां भारतीय कानूनों और CITES प्रावधानों के पूर्ण अनुरूप हैं।
इस न्यायिक स्वीकृति ने Vantara के संचालन की वैधता को मजबूत किया और यह दिखाया कि भारत का वन्यजीव शासन ढांचा वैश्विक संरक्षण मानकों के साथ पूर्ण सामंजस्य में कार्य कर रहा है।
Vantara: भारत का पशु कल्याण का नया अध्याय
Reliance Foundation द्वारा स्थापित Vantara आज एशिया की सबसे महत्वाकांक्षी पशु कल्याण पहलों में से एक बन चुकी है।
इसका उद्देश्य घायल, दुर्व्यवहार से पीड़ित या संकटग्रस्त वन्यजीवों का बचाव, पुनर्वास और जीवनभर की देखभाल सुनिश्चित करना है।
गुजरात में फैले लगभग 3,500 एकड़ क्षेत्र में यह केंद्र फैला हुआ है। रिपोर्टों के अनुसार, यहां 25,000 से अधिक वन्यजीव और 48 से अधिक प्रजातियां रह रही हैं। व्यापक दायरे में देखा जाए तो यह केंद्र और इसके संबद्ध संस्थान 2,000 से अधिक प्रजातियों के 1,50,000 से ज्यादा पशुओं की देखभाल कर चुके हैं।
Vantara पारंपरिक चिड़ियाघरों से अलग दृष्टिकोण अपनाता है-यह “प्रदर्शन” नहीं बल्कि “उपचार और पुनर्वास” पर केंद्रित है।
एशिया का पहला अत्याधुनिक वन्यजीव अस्पताल
Vantara का सबसे महत्वपूर्ण भाग है इसका एशिया का पहला हाई-टेक वाइल्डलाइफ़ हॉस्पिटल, जिसमें मौजूद हैं:
- CT और MRI स्कैनिंग
- अल्ट्रासाउंड और एंडोस्कोपी यूनिट्स
- लाइव सर्जरी वीडियो फीड सिस्टम्स
- डिजिटल रेडियोलॉजी और माइक्रोबायोलॉजी लैब्स
यहाँ पशुओं के लिए जटिल सर्जरी, ऑर्थोपेडिक उपचार, पुनर्वास और आपातकालीन देखभाल की उन्नत सुविधाएं उपलब्ध हैं।
विशेष रूप से, यहां नवजात अनाथ वन्यजीवों की चिकित्सा और पोस्ट-ऑपरेटिव रिकवरी के लिए अलग यूनिट्स हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस अस्पताल ने एशियाई वन्यजीव चिकित्सा के क्षेत्र में नई दिशा प्रदान की है।
विशेष देखभाल क्षेत्र और पुनर्वास केंद्र
Vantara में विभिन्न प्रजातियों की जैविक और व्यवहारिक जरूरतों के अनुसार विशेष रिहैबिलिटेशन ज़ोन बनाए गए हैं।
यहाँ का Elephant Care Zone सबसे प्रसिद्ध है-जिसमें हाइड्रोथेरपी पूल्स, आधुनिक रिकवरी वार्ड्स और एन्क्लोज़र हैं जो हाथियों को प्राकृतिक वातावरण में स्वस्थ होने का मौका देते हैं।
इसी तरह, Leopard Rescue Centre को “दुनिया का सबसे बड़ा तेंदुआ पुनर्वास केंद्र” कहा गया है।
इसके अलावा, यहाँ भारत का सबसे बड़ा क्वारंटाइन ज़ोन भी है जहाँ हर बचाए गए पशु की चिकित्सा जांच की जाती है।
Vantara के पास 75 से अधिक आधुनिक एम्बुलेंस और एक विशाल पशु चिकित्सा फ़ार्मेसी नेटवर्क भी है, जो बचाव से लेकर दीर्घकालिक उपचार तक हर स्तर पर सहायता प्रदान करता है।
व्यावसायिकता नहीं, संरक्षण प्राथमिकता
CITES रिपोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि Vantara या इसके संबद्ध केंद्रों में “जानवरों की बिक्री या उनके प्रजनन से जुड़ी किसी व्यावसायिक गतिविधि का कोई प्रमाण नहीं मिला।”
यह बयान इस तथ्य को और मजबूत करता है कि Vantara का उद्देश्य केवल पशु कल्याण और संरक्षण है-न कि कोई व्यावसायिक लाभ।
प्रत्येक बचाए गए पशु को या तो पुनर्वास के बाद जंगल में छोड़ा जाता है या फिर जीवनभर की देखभाल प्रदान की जाती है।
यह भी पढ़े: Can we visit Vantara? वंतारा घूमने जा सकते हैं क्या? एक सम्पूर्ण जानकारी
भारत के लिए वैश्विक मॉडल
CITES सचिवालय ने भारत सरकार और Vantara प्रबंधन को धन्यवाद देते हुए कहा कि उन्होंने मिशन और साइट विजिट्स को “उत्कृष्ट संगठन और पारदर्शिता” के साथ आयोजित किया।
यह मान्यता इस पहल को एक वैश्विक मॉडल के रूप में स्थापित करती है-जहाँ निजी क्षेत्र और सरकार मिलकर वन्यजीवों के बचाव और देखभाल के लिए काम कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि Vantara ने यह दिखाया है कि आधुनिक तकनीक, सहानुभूति और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को जोड़कर कैसे सतत वन्यजीव संरक्षण किया जा सकता है।
भविष्य की दिशा और वैश्विक प्रभाव
Vantara की यह सफलता सिर्फ भारत के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक प्रेरणा है।
CITES की इस सराहना से अन्य देशों को भी भारत के इस मॉडल को अपनाने की प्रेरणा मिल सकती है-जो पारदर्शिता, तकनीकी नवाचार और संवेदनशीलता पर आधारित है।
Vantara आने वाले वर्षों में और भी बड़े स्तर पर वैज्ञानिक शोध, पशु चिकित्सा प्रशिक्षण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने की योजना बना रहा है।
CITES की रिपोर्ट और भारत के सुप्रीम कोर्ट की पुष्टि के बाद यह पहल अब एक विश्वस्तरीय बेंचमार्क बन चुकी है — जो दर्शाती है कि भारत न सिर्फ पर्यावरणीय जिम्मेदारी निभा रहा है, बल्कि दुनिया को एक नई दिशा भी दिखा रहा है।
यह भी पढ़े: Phantasticus Pictures ने लॉन्च की VANTARA SANCTUARY STORIES: विश्व की सबसे बड़ी वन्यजीव डॉक्यूसीरीज़
निष्कर्ष
Vantara ने यह साबित कर दिया है कि आधुनिक विज्ञान और मानवीय संवेदना जब साथ आते हैं, तो वन्यजीव संरक्षण का नया अध्याय लिखा जा सकता है।
यह पहल न केवल भारत की प्रतिष्ठा को बढ़ाती है, बल्कि वैश्विक स्तर पर यह संदेश देती है कि सच्चा संरक्षण लाभ में नहीं, बल्कि जीवन के प्रति करुणा में है।

