Vantara team in Ujjain

Vantara team in Ujjain: उज्जैन में 350 करोड़ की लागत से बनेगा इंटरनेशनल सफारी और रेस्क्यू सेंटर

उज्जैन, मध्यप्रदेश: Vantara team: धर्म नगरी उज्जैन अब जल्द ही एक नए अंतरराष्ट्रीय स्तर के वन्यजीव आकर्षण का केंद्र बनने जा रही है। Vantara team in Ujjain ने हाल ही में उज्जैन के नवलखी फॉरेस्ट एरिया (मक्सी रोड) का विस्तृत सर्वे किया है। इस प्रोजेक्ट के तहत लगभग ₹350 करोड़ की लागत से एक अत्याधुनिक सफारी, रेस्क्यू सेंटर और जू (Zoo) तैयार किया जा रहा है, जो प्रदेश में पर्यटन और वन्यजीव संरक्षण दोनों को नई ऊँचाइयाँ देगा।

वनतारा टीम ने शुरू किया फॉरेस्ट एरिया का सर्वे

Vantara team in Ujjain ने उज्जैन के मक्सी रोड स्थित नवलखी फॉरेस्ट एरिया का दौरा किया, जहां उन्होंने क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति, वन्यजीव संभावनाओं और पर्यावरणीय संरचना का अध्ययन किया। इस दौरान उज्जैन के डीएफओ अनुराग तिवारी भी टीम के साथ मौजूद रहे।

डीएफओ तिवारी ने बताया कि “यह प्रोजेक्ट मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का ड्रीम प्रोजेक्ट है। हम इसे सिंहस्थ 2028 से पहले पूरा करने की दिशा में काम कर रहे हैं, ताकि उज्जैन में पर्यटन और वन्यजीव संरक्षण दोनों को नई पहचान मिल सके।”

201 हेक्टेयर क्षेत्र में होगा विकास कार्य

इस मेगा प्रोजेक्ट को 201 हेक्टेयर में विकसित किया जा रहा है। पूरा क्षेत्र इस तरह डिजाइन किया जाएगा कि पर्यटक यहां शेर, बाघ और चीता जैसे जानवरों को प्राकृतिक माहौल में देख सकें।
लगभग 4 किलोमीटर लंबा टाइगर सफारी जोन तैयार किया जाएगा, जो ओडिशा के नंदनकानन जू की तरह ही अत्याधुनिक होगा।

डीएफओ तिवारी के अनुसार, “इस पूरे परिसर को लैंडस्केप मॉडल पर तैयार किया जाएगा ताकि पर्यटकों को एक नेचुरल जंगल का अनुभव मिल सके। यह उज्जैन को एक ग्लोबल वाइल्डलाइफ टूरिज्म डेस्टिनेशन बनाने की दिशा में बड़ा कदम होगा।”

कौन-कौन से जानवर होंगे शामिल

प्रोजेक्ट की प्रारंभिक योजना के अनुसार, इस नए जू और सफारी में 47 अलग-अलग एनक्लोज़र (बाड़े) बनाए जाएंगे। इनमें कई प्रजातियों के जानवर होंगे, जैसे —

  • बाघ और सफेद बाघ
  • तेंदुआ और चीता
  • भेड़िए, लकड़बग्घे
  • हाथी, हिरण, जिराफ
  • खरगोश, पक्षी, अमीबा जैसे छोटे जीव
  • शाकाहारी और मांसाहारी दोनों वर्गों के पशु

हर प्राणी के लिए अलग अस्पताल और रेस्क्यू सेंटर भी होगा, जहां डॉक्टर्स और विशेषज्ञों की नियुक्ति की जाएगी ताकि घायल या बीमार जानवरों का तुरंत इलाज हो सके।

मध्यप्रदेश का दूसरा रेस्क्यू सेंटर

अभी तक मध्यप्रदेश में वन्यजीवों के लिए सिर्फ भोपाल स्थित वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में ही रेस्क्यू सेंटर है।
लेकिन उज्जैन में यह बनने के बाद राज्य को दूसरा बड़ा वन्यजीव बचाव केंद्र मिलेगा।

इस नवलखी फॉरेस्ट एरिया में मिनी रेल सुविधा की भी योजना है ताकि पर्यटक आसानी से पूरे जंगल क्षेत्र का भ्रमण कर सकें।
इसके अलावा नाइट सफारी (रात की सैर) पर भी टीम काम कर रही है, जिससे पर्यटक रात में भी वन्यजीवों को प्राकृतिक वातावरण में देख सकें।

मुख्यमंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट: प्रकृति और शिक्षा का संगम

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का यह ड्रीम प्रोजेक्ट है, जिसे वनतारा की विशेषज्ञ टीम के साथ मिलकर आगे बढ़ाया जा रहा है।
यहां स्कूली छात्रों और पर्यटकों के लिए कई इंटरएक्टिव एक्टिविटीज़ होंगी — जैसे नेचर वॉक, कार्यशालाएं, और वाइल्डलाइफ प्रदर्शनी।

साथ ही इस प्रोजेक्ट में वर्षा जल संरक्षण, सौर ऊर्जा का उपयोग, और जानवरों के लिए खुले प्राकृतिक आवास बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
थीम ज़ोन भी बनाए जाएंगे जो उज्जैन की धार्मिक और पौराणिक पहचान को दर्शाएंगे — जैसे महाकाल थीम ज़ोन और भारतीय पौराणिक जीव क्षेत्र

Vantara team in Ujjain में शामिल रहे अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ

इस सर्वे में Vantara team in Ujjain के साथ कई अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ शामिल थे, जिनमें शामिल हैं —

  • डॉ. इयान – अंतरराष्ट्रीय जू विशेषज्ञ
  • एडम गेट्रिक्स – वाइल्डलाइफ मैनेजमेंट स्पेशलिस्ट
  • कैरोलिना स्टामेंटे – लैंडस्केप आर्किटेक्ट
  • अलीशा मेनेजेस – पर्यावरण डिज़ाइन विशेषज्ञ
  • क्रिस्टोफर लियोंग – फॉरेस्ट प्लानर

इन सभी विशेषज्ञों ने पूरे क्षेत्र की टोपोग्राफी, पर्यावरणीय संरचना और जलवायु परिस्थितियों का अध्ययन किया।
उन्होंने सिंगापुर सहित कई देशों के सफल वाइल्डलाइफ पार्क्स के मॉडल्स का विश्लेषण कर उज्जैन के लिए एक विश्वस्तरीय डिजाइन पेश किया।

वैश्विक मानकों पर तैयार होगा उज्जैन का सफारी प्रोजेक्ट

वनतारा टीम की रिपोर्ट के अनुसार, उज्जैन का यह प्रोजेक्ट अंतरराष्ट्रीय मानकों पर आधारित होगा।
यहां सभी सुविधाएं — जैसे पशु संरक्षण, सफारी प्रबंधन, विज़िटर इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा — अंतरराष्ट्रीय स्तर की होंगी।

इससे उज्जैन न केवल भारत बल्कि दुनिया भर में वाइल्डलाइफ टूरिज्म हब के रूप में पहचाना जाएगा।
यह प्रोजेक्ट प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देगा और स्थानीय लोगों को रोज़गार के नए अवसर प्रदान करेगा।

धार्मिक पहचान और पर्यावरणीय संतुलन का संगम

उज्जैन, जो महाकाल मंदिर और अपनी पौराणिक पहचान के लिए विश्वप्रसिद्ध है, अब पर्यावरणीय दृष्टि से भी एक मिसाल बनने जा रहा है।
यहां विकसित होने वाला थीम ज़ोन “इंडियन मिथिकल वाइल्डलाइफ सेक्शन” कहलाएगा, जिसमें भारतीय ग्रंथों में वर्णित जीव-जंतुओं की झलक देखने को मिलेगी।

इससे धार्मिक पर्यटन और वाइल्डलाइफ टूरिज्म का सुंदर संगम बनेगा, जो पर्यटकों को एक नया अनुभव देगा।

सस्टेनेबल डेवलपमेंट और लोकल इन्वॉल्वमेंट

इस प्रोजेक्ट में हर स्तर पर सस्टेनेबिलिटी (सतत विकास) का ध्यान रखा जाएगा —

  • सोलर एनर्जी से बिजली की व्यवस्था
  • जल संरक्षण और रीसाइक्लिंग सिस्टम
  • पर्यावरण के अनुकूल निर्माण
  • स्थानीय समुदायों की भागीदारी

Vantara team in Ujjain का उद्देश्य है कि आसपास के गांवों को भी इस विकास से जोड़ा जाए ताकि लोगों को रोज़गार और पर्यावरण जागरूकता दोनों मिलें।

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पर्यटन और रोजगार को मिलेगा नया आयाम

पर्यटन विभाग का अनुमान है कि यह प्रोजेक्ट शुरू होने के बाद उज्जैन में पर्यटन और रोजगार दोनों में बड़ी बढ़ोतरी होगी।
वन रेंजर्स, वेटनरी डॉक्टर्स, टूर गाइड्स, होटल्स, और ट्रांसपोर्ट जैसे सेक्टर्स में सैकड़ों रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

यह पहल मध्यप्रदेश को भारत का “Wildlife Capital” बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम है —
कान्हा, बांधवगढ़, पेंच, सतपुड़ा जैसे प्रसिद्ध नेशनल पार्क्स के बाद अब नवलखी सफारी उज्जैन नया आकर्षण बनेगा।

भविष्य की दिशा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग

सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस प्रोजेक्ट के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर भी विचार चल रहा है।
Vantara team in Ujjain भविष्य में विभिन्न विदेशी विश्वविद्यालयों और एनजीओ के साथ मिलकर वाइल्डलाइफ अनुसंधान और तकनीकी सहयोग पर काम कर सकती है।

जब यह प्रोजेक्ट पूरा होगा, तब यह न केवल उज्जैन बल्कि पूरे भारत के लिए एक नया पर्यावरणीय मॉडल बनेगा।

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निष्कर्ष: उज्जैन की हरियाली में एक नया अध्याय

₹350 करोड़ की लागत से बनने वाला यह इंटरनेशनल सफारी और रेस्क्यू सेंटर उज्जैन को विश्व पटल पर एक नई पहचान देगा।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के विज़न और वनतारा टीम की विशेषज्ञता से यह प्रोजेक्ट पर्यटन, शिक्षा और संरक्षण — तीनों का आदर्श उदाहरण बनेगा।

वर्तमान में Vantara team in Ujjain लगातार सर्वे और बैठकें कर रही है ताकि प्रोजेक्ट समय पर और वैश्विक मानकों के अनुरूप पूरा किया जा सके।
यह पहल उज्जैन को न केवल धार्मिक बल्कि पर्यावरणीय दृष्टि से भी एक “World-Class Wildlife Destination” बनाएगी।

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