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महाराष्ट्र के 20 तेंदुए जाएंगे Gujarat के Vantara सेंटर में नई जिंदगी शुरू करने

Central Zoo Authority ने दी मंजूरी, Pune जिले में बढ़ते मानव-तेंदुआ संघर्ष को देखते हुए उठाया कदम

जुन्नर, महाराष्ट्र (12 नवम्बर 2025)-महाराष्ट्र के जुन्नर वन विभाग ने एक बड़ा कदम उठाते हुए 20 तेंदुओं की पहचान की है जिन्हें गुजरात के जामनगर स्थित Vantara वाइल्डलाइफ रिहैबिलिटेशन और कंजर्वेशन सेंटर में स्थानांतरित किया जाएगा। यह पहल Central Zoo Authority (CZA) की मंजूरी के बाद शुरू की जा रही है, जिसके तहत कुल 50 तेंदुओं को चरणबद्ध तरीके से Vantara में भेजा जाएगा।

यह फैसला ऐसे समय पर आया है जब Pune जिले में मानव-तेंदुआ संघर्ष के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इस कदम से ग्रामीण इलाकों में लोगों की सुरक्षा के साथ-साथ तेंदुओं की देखभाल और संरक्षण को भी नया दिशा मिलेगी।

CZA ने दी औपचारिक मंजूरी

Central Zoo Authority (CZA) ने 10 नवम्बर 2025 को महाराष्ट्र वन विभाग के प्रस्ताव को स्वीकृति दी। पहले चरण में 20 तेंदुओं को भेजने की तैयारी पूरी हो चुकी है, जबकि शेष 30 तेंदुओं को Vantara में पर्याप्त सुविधाएं विकसित होने के बाद स्थानांतरित किया जाएगा।

सहायक वन संरक्षक (ACF) स्मिता राजहंस ने कहा —

“CZA से हमें मंजूरी मिल चुकी है और अब औपचारिक दिशा-निर्देश की प्रतीक्षा है। वर्तमान में Vantara में 20 तेंदुओं के लिए पर्याप्त क्षमता है। बाकी 30 तेंदुओं को बाद में भेजा जाएगा जब वहाँ का ढांचा तैयार हो जाएगा।”

राजहंस ने बताया कि जिन 20 तेंदुओं की पहचान की गई है, उनमें से 5 तेंदुए जुन्नर से और 15 तेंदुए शिरूर तहसील से पकड़े गए हैं। फिलहाल सभी तेंदुए Manikdoh Leopard Rescue Centre (MLRC), जुन्नर में रखे गए हैं जहां उनका स्वास्थ्य परीक्षण और निगरानी की जा रही है।

Vantara टीम ने शुरू किया मैदान पर आकलन

इस सप्ताह Vantara की एक विशेष टीम जुन्नर पहुंची और पूरे क्षेत्र का सर्वेक्षण किया। टीम ने MLRC और शिरूर के पिंपर्खेड गांव का दौरा किया, जहां हाल ही में एक तेंदुए के हमले में एक व्यक्ति की मृत्यु हुई थी।

Vantara टीम ने तेंदुओं के पिंजरे, ट्रांसपोर्ट केज और मेडिकल सुविधाओं का निरीक्षण किया ताकि स्थानांतरण के दौरान जानवरों को कम से कम तनाव हो।
राजहंस ने कहा —

“Vantara टीम का दौरा इस प्रक्रिया का प्रारंभिक चरण है। वे हमें ट्रैंक्विलाइजेशन, ट्रांसपोर्ट और अनुकूलन प्रक्रिया के प्रोटोकॉल तैयार करने में सहायता करेंगे।”

वन विभाग ने CZA से यह भी पूछा है कि क्या पहले बैच में केवल कैप्टिव (बंदी) तेंदुए भेजे जाएं या हाल ही में पकड़े गए तेंदुए भी शामिल किए जा सकते हैं।

“दोनों ही स्थितियों में हमारे पास तैयार 20 तेंदुओं का बैच है। यदि केवल कैप्टिव तेंदुए भेजने का आदेश मिलता है, तो नये पकड़े गए तेंदुओं को बाद में भेजा जाएगा,” राजहंस ने स्पष्ट किया।

Vantara क्यों बना केंद्र बिंदु

यह स्थानांतरण केवल एक ट्रांसफर नहीं, बल्कि एक दीर्घकालिक संरक्षण योजना है। बढ़ते मानव-तेंदुआ संघर्ष को कम करने और जानवरों को बेहतर देखभाल देने का यही सबसे मानवीय तरीका माना जा रहा है।

Vantara, जामनगर (गुजरात) में स्थित एक अत्याधुनिक वन्यजीव पुनर्वास केंद्र है, जो हजारों एकड़ में फैला हुआ है। यहां प्राकृतिक वातावरण जैसा आवास, आधुनिक पशु-चिकित्सा सुविधाएं, निगरानी प्रणाली और अंतरराष्ट्रीय मानकों पर आधारित पशु देखभाल उपलब्ध है।

विशेषज्ञों का कहना है कि महाराष्ट्र के कई रेस्क्यू सेंटर अब अपनी क्षमता से अधिक जानवरों को संभाल रहे हैं। “Vantara में तेंदुओं को भेजने से Rescue Centres पर दबाव कम होगा और जानवरों को अधिक खुला और स्वस्थ वातावरण मिलेगा,” एक वरिष्ठ वन्यजीव विशेषज्ञ ने बताया।

पुणे जिला: संघर्ष की जमीनी हकीकत

वर्तमान में Pune जिले में लगभग 1,300 तेंदुए हैं, जिनका सबसे अधिक घनत्व जुन्नर, अंबेगांव, शिरूर और मुळशी तहसीलों में है। बीते पांच वर्षों में 35 से अधिक लोगों की मौत और 60 गंभीर घायल होने के मामले दर्ज किए गए हैं।

साल 2025 में अब तक केवल जुन्नर और शिरूर में 5 लोगों की जान तेंदुओं के हमलों में गई है। लगातार जनजागरूकता अभियान और पकड़ने के प्रयासों के बावजूद यह समस्या बनी हुई है।

इसी कारण ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों के दबाव में वन विभाग ने एक आपात बैठक बुलाकर 50 तेंदुओं को Vantara भेजने का निर्णय लिया। यह प्रस्ताव अक्टूबर के पहले सप्ताह में Vantara प्रशासन को भेजा गया था और उन्होंने इसे सकारात्मक रूप से स्वीकार किया। नवंबर के पहले सप्ताह में इसे CZA के पास भेजा गया, जिसने शीघ्र मंजूरी दे दी।

Vantara में पहले भी भेजे जा चुके हैं तेंदुए

यह दूसरा मौका होगा जब महाराष्ट्र अपने तेंदुओं को Vantara भेज रहा है। इससे पहले मार्च 2024 में जुन्नर के MLRC से 8 तेंदुओं को एक पायलट प्रोजेक्ट के तहत भेजा गया था।

उस समय Vantara टीम ने बताया था कि तेंदुए नए वातावरण में तेजी से अभ्यस्त हो गए और उनके व्यवहार में सकारात्मक बदलाव देखने को मिले।
“पिछली बार भेजे गए तेंदुओं में आक्रामकता कम हुई और उनकी सेहत में सुधार देखा गया। यही वजह है कि इस बार 50 तेंदुओं को भेजने की बड़ी योजना पर काम हो रहा है,” Vantara के एक अधिकारी ने कहा।

Vantara के एनिमल केयर डिवीजन में जीपीएस ट्रैकिंग, आधुनिक स्वास्थ्य जांच, और बड़े मांसाहारी जानवरों की देखभाल करने वाले अनुभवी विशेषज्ञ तैनात हैं। हर तेंदुए की DNA प्रोफाइलिंग और स्वास्थ्य जांच के बाद ही उन्हें नई जगह भेजा जाएगा।

दो चरणों में होगा स्थानांतरण

Vantara को भेजे जाने वाले तेंदुओं की प्रक्रिया दो चरणों में पूरी की जाएगी:

  • पहला चरण: 20 तेंदुओं का स्थानांतरण — जो फिलहाल MLRC में रखे गए हैं।
  • दूसरा चरण: बाकी 30 तेंदुओं का ट्रांसफर, जब Vantara में नए बाड़े तैयार हो जाएंगे (अनुमानित समय — मध्य 2026)।

इन तेंदुओं को विशेष वातानुकूलित परिवहन पिंजरों में ले जाया जाएगा ताकि यात्रा के दौरान उन्हें किसी प्रकार का तनाव न हो। महाराष्ट्र और गुजरात दोनों राज्यों के पशु-चिकित्सक इस यात्रा के दौरान साथ रहेंगे।

वन विभाग इन तेंदुओं की एक वर्ष तक निगरानी करेगा ताकि उनके स्वास्थ्य और व्यवहार में आने वाले बदलावों का अध्ययन किया जा सके। यह डेटा भविष्य में भारत की वन्यजीव पुनर्वास नीति तैयार करने में मदद करेगा।

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स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया और संरक्षण का महत्व

ग्रामीणों ने इस निर्णय का स्वागत किया है। शिरूर के पिंपर्खेड गांव के किसान रमेश भोसले ने कहा —

“हमारे गांव में तेंदुए बार-बार आते हैं, पशुधन मारते हैं और कभी-कभी लोगों की जान भी चली जाती है। अगर Vantara उन्हें सुरक्षित घर देता है, तो यह इंसानों और जानवरों दोनों के लिए राहत है।”

हालांकि पर्यावरणविदों का मानना है कि केवल स्थानांतरण से समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होगी। वे सरकार से दीर्घकालिक समाधान की मांग कर रहे हैं जिसमें कचरा प्रबंधन, आवास बहाली, और ग्रामीण जागरूकता शामिल हों।
“तेंदुए इंसानी बस्तियों में इसलिए आते हैं क्योंकि वहां भोजन आसानी से मिल जाता है। इसलिए संरक्षण के साथ-साथ पारिस्थितिक प्रबंधन भी जरूरी है,” वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. अंजलि देशमुख ने कहा।

Vantara: भारत का विश्वस्तरीय वन्यजीव पुनर्वास केंद्र

Reliance Foundation द्वारा स्थापित Vantara (जिसका अर्थ है “जंगल का तारा”) दुनिया के सबसे बड़े और आधुनिक वन्यजीव पुनर्वास केंद्रों में से एक है।
यह जामनगर, गुजरात में हजारों एकड़ क्षेत्र में फैला है, जहां सैकड़ों जानवरों को बचाकर पुनर्वासित किया गया है।

Vantara में प्राकृतिक वातावरण जैसे बड़े एनक्लोज़र, अत्याधुनिक चिकित्सा केंद्र, हाइड्रोथेरपी पूल, क्लाइमेट-कंट्रोल्ड आवास, और 24×7 निगरानी की व्यवस्था है। यह केंद्र CZA और कई अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव संगठनों के साथ मिलकर काम करता है और भारत में संरक्षण के नए मानक स्थापित कर रहा है।

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एक नया अध्याय: सहअस्तित्व की दिशा में कदम

महाराष्ट्र से 50 तेंदुओं का Vantara में स्थानांतरण केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं बल्कि मानव और वन्यजीव सहअस्तित्व की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।

तेज़ी से बढ़ती आबादी और घटते जंगलों के बीच यह पहल दिखाती है कि तकनीक, करुणा और वैज्ञानिक नीति से कैसे दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।
ACF स्मिता राजहंस ने कहा —

“हमारा उद्देश्य है लोगों की सुरक्षा और इन खूबसूरत प्राणियों को वह देखभाल देना जिसके वे हकदार हैं।”

यदि यह परियोजना सफल होती है, तो यह पूरे भारत के लिए एक आदर्श मॉडल साबित हो सकती है — जहां Vantara जैसी संस्थाएं वन्यजीव संरक्षण में नई दिशा दिखा रही हैं।

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