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हैदराबाद चिड़ियाघर में Vantara से आएंगे दो और ज़ेबरा, विदेशी प्रजातियों की वापसी से बढ़ेगा आकर्षण

Vantara: हैदराबाद का प्रसिद्ध नेहरू जूलॉजिकल पार्क एक बार फिर विदेशी वन्यजीवों की मौजूदगी से और अधिक जीवंत होने जा रहा है। गुजरात के जामनगर में स्थित ग्लोबल वाइल्डलाइफ रेस्क्यू और कंजर्वेशन सेंटर Vantara से जल्द ही दो और ज़ेबरा हैदराबाद चिड़ियाघर लाए जाएंगे। इनके आने के बाद चिड़ियाघर में ज़ेबरा की संख्या बढ़कर पाँच हो जाएगी, जिससे दर्शकों को इन आकर्षक और दुर्लभ प्रजातियों को करीब से देखने का बेहतर अवसर मिलेगा।

फिलहाल, नेहरू जूलॉजिकल पार्क में तीन ज़ेबरा मौजूद हैं, जिनमें दो नर और एक मादा शामिल हैं। ये सभी ज़ेबरा भी Vantara से ही लाए गए थे। इनकी खास बात यह है कि लगभग 37 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद ज़ेबरा की हैदराबाद चिड़ियाघर में वापसी हुई थी। अब दो और ज़ेबरा के शामिल होने से न सिर्फ इनके प्राकृतिक व्यवहार को समझने में मदद मिलेगी, बल्कि प्रजनन और संरक्षण की दृष्टि से भी यह कदम अहम माना जा रहा है।

विदेशी प्रजातियों की ऐतिहासिक वापसी

नेहरू जूलॉजिकल पार्क कभी विदेशी जानवरों के लिए जाना जाता था, लेकिन समय के साथ कई प्रजातियाँ यहां से हट गई थीं। ज़ेबरा की वापसी ने चिड़ियाघर के पुराने गौरव को फिर से जीवित किया है। अधिकारियों के अनुसार, Vantara जैसे आधुनिक और वैज्ञानिक वन्यजीव संरक्षण केंद्र से जानवरों को लाने का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वे स्वस्थ हों और नए वातावरण में आसानी से ढल सकें।

वॉलबीज़ को लाने की भी तैयारी

ज़ेबरा के अलावा, हैदराबाद चिड़ियाघर ऑस्ट्रेलिया में पाए जाने वाले कंगारू जैसे जानवर, वॉलबीज़ की एक जोड़ी को भी लाने की योजना बना रहा है। वॉलबी आकार में कंगारू से छोटे होते हैं और उनकी औसत ऊंचाई लगभग तीन फीट होती है, जबकि कंगारू आठ फीट तक ऊंचे हो सकते हैं। 37 साल पहले चिड़ियाघर में विदेशी मार्सुपियल प्रजातियाँ देखी गई थीं, और अब एक बार फिर इनके लौटने की संभावना से वन्यजीव प्रेमियों में उत्साह है।

दर्शकों और संरक्षण दोनों के लिए फायदेमंद

विशेषज्ञों का मानना है कि ज़ेबरा और वॉलबी जैसे विदेशी जानवरों की मौजूदगी से चिड़ियाघर की शैक्षणिक और संरक्षण संबंधी भूमिका और मजबूत होगी। बच्चे और युवा न केवल इन प्रजातियों को देख सकेंगे, बल्कि उनके प्राकृतिक आवास, व्यवहार और संरक्षण की जरूरतों के बारे में भी जान पाएंगे। Vantara से आने वाले जानवरों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार देखभाल और स्वास्थ्य जांच के बाद ही स्थानांतरित किया जाता है, जिससे उनकी सुरक्षा सुनिश्चित रहती है।

Vantara की भूमिका

Vantara आज भारत ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक अहम नाम बन चुका है। यहां घायल, संकटग्रस्त और दुर्लभ जानवरों की देखभाल की जाती है और उन्हें सुरक्षित वातावरण में पुनर्वास दिया जाता है। हैदराबाद चिड़ियाघर को Vantara से जानवर मिलने से दोनों संस्थानों के बीच संरक्षण सहयोग को भी बढ़ावा मिलेगा।

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बढ़ेगा पर्यटन और आकर्षण

चिड़ियाघर प्रशासन को उम्मीद है कि ज़ेबरा और वॉलबी जैसे जानवरों की संख्या बढ़ने से पर्यटकों की आमद में इज़ाफा होगा। पहले से ही नेहरू जूलॉजिकल पार्क देश के सबसे बड़े और लोकप्रिय चिड़ियाघरों में गिना जाता है। नई प्रजातियों की एंट्री से यह दक्षिण भारत के प्रमुख वन्यजीव पर्यटन केंद्रों में अपनी स्थिति और मजबूत करेगा।

कुल मिलाकर, Vantara से आने वाले दो नए ज़ेबरा और प्रस्तावित वॉलबीज़ हैदराबाद चिड़ियाघर के लिए एक बड़ा कदम हैं। यह पहल न केवल दर्शकों के अनुभव को समृद्ध करेगी, बल्कि वन्यजीव संरक्षण और जागरूकता की दिशा में भी एक सकारात्मक संदेश देगी।

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