Vantara team: रांची: झारखंड के चाईबासा जिले के सरांदा जंगलों में एक जंगली हाथी IED विस्फोट में घायल हो गया। वन अधिकारियों के अनुसार, यह विस्फोट माओवादी द्वारा लगाए गए IED की वजह से हुआ माना जा रहा है।
घटना इतनी भीषण थी कि हाथी के दाहिने आगे के पंजे के अंगुलियां उड़ गईं और घाव से मांस के टुकड़े लटक रहे थे। घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग और पुलिस को अलर्ट कर दिया गया।
घायल हाथी का हाल और शुरुआती जानकारी
सरांदा के डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर (DFO) अविरूप सिन्हा ने बताया, “हाथी के दाहिने सामने के पैर पर घाव ताजा लग रहा है। यह घाव उन तीन हाथियों के घावों से मिलता-जुलता है जो पहले IED विस्फोट में घायल हुए थे और बाद में उनकी मौत हो गई थी। हमें मध्यरात्रि में इस बारे में सूचना मिली और वर्तमान में उसका इलाज चल रहा है।”
हाथी को सबसे पहले सरांदा के अंकुआ जंगल में देखा गया था। DFO ने यह भी कहा कि अभी यह पुष्टि नहीं हो पाई है कि हाथी घाव IED विस्फोट की वजह से हुआ है या नहीं, लेकिन घावों के पैटर्न को देखकर ऐसा प्रतीत होता है। रक्तस्राव पिछले तीन हाथियों की तुलना में कम है।
Vantara team उपचार के लिए उठाए गए कदम
DFO ने बताया कि घायल हाथी के इलाज के लिए मोबाइल वेटेरिनरी यूनिट को तैनात किया गया है। साथ ही, पड़ोसी ब्लॉक्स से तीन अतिरिक्त टीमों के प्रशिक्षित पशु चिकित्सकों को बुलाया गया है।
उन्होंने कहा, “Vantara team भी हाथी के इलाज के लिए आ रही है। यह टीम हाथी को सुरक्षित स्थान पर ले जाने और बेहतर इलाज सुनिश्चित करने में मदद करेगी।”
हाथी को सुरक्षित स्थान पर ले जाने की कोशिश
हाथी पर देखरेख कर रहे पशु चिकित्सक डॉ. संजय कुमार ने बताया कि हाथी को एंटीबायोटिक्स, दर्द निवारक और सूजन कम करने वाली दवाइयां दी जा चुकी हैं। घाव गहरा है और यह विस्फोट की गंभीरता को दर्शाता है।
डॉ. कुमार ने कहा, “हम हाथी को ऐसे सुरक्षित स्थान पर ले जाने की कोशिश कर रहे हैं जहां उसे लगातार और बेहतर इलाज मिल सके। घायल हाथी एक मादा है, जिसकी उम्र लगभग 10-12 साल है। गंभीर चोट की वजह से वह चल नहीं पा रही है। वन विभाग के कर्मचारी लगातार उसकी देखभाल कर रहे हैं और जल्द ठीक होने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं।”
माओवादी गतिविधियों और खतरे की गंभीरता
इस घटना ने वन अधिकारियों में चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि यह क्षेत्र पहले से ही माओवादी गतिविधियों और IED विस्फोटों के कारण हाथियों के लिए खतरनाक माना जाता है।
DFO ने बताया कि अंकुआ जंगल में माओवादी की गतिविधियां नहीं हैं, इसलिए यह सवाल उठता है कि यह हाथी कैसे IED विस्फोट का शिकार हुआ। संभावना है कि कहीं और विस्फोट हुआ और घायल हाथी दर्द में भटकते हुए इस जंगल में पहुंचा।
सरांदा में IED से प्रभावित यह चौथा हाथी
यह घटना सरांदा जंगलों में IED विस्फोट से घायल होने वाले चौथे हाथी की है। पिछले तीन हाथियों को इसी तरह के विस्फोट में चोटें आई थीं और वे अपनी चोटों का इलाज नहीं कर पाए। इनमें से दो की इलाज के दौरान मौत हो गई और एक को जंगल में मृत पाया गया।
वन विभाग ने इस मुद्दे को गंभीरता से लिया है और हाथियों की सुरक्षा के लिए विशेष निगरानी बढ़ा दी है। अधिकारी लगातार जंगलों में गश्त कर रहे हैं और घायल हाथी के इलाज पर पूरा ध्यान दे रहे हैं।
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निष्कर्ष
सरांदा जंगलों में हाथियों के लिए खतरे की यह घटना मानव और वन्यजीवन के बीच लगातार संघर्ष को दर्शाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि हाथियों की सुरक्षा के लिए नियमित निगरानी, प्रशिक्षित टीमों की मदद और आपातकालीन इलाज की व्यवस्था बेहद जरूरी है।
इस बीच Vantara team और वन विभाग की संयुक्त कोशिशें घायल हाथी को सुरक्षित रखने और उसके जीवन को बचाने पर केंद्रित हैं।

