इंदौर (मध्य प्रदेश) – शहर के मशहूर हाथी मोती को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। सोमवार को एक उच्चस्तरीय समिति ने आदेश जारी कर उसे Vantara Rescue and Rehabilitation Centre (जामनगर) भेजने का निर्देश दिया। लेकिन इस आदेश का कमला नेहरू प्राणी संग्रहालय और इंदौर नगर निगम ने कड़ा विरोध किया है। अधिकारियों का कहना है कि मोती की उम्र और कमजोर स्वास्थ्य को देखते हुए उसका लंबा सफर उसकी जान के लिए खतरा साबित हो सकता है।
उच्चस्तरीय समिति ने दिया Vantara भेजने का आदेश
समिति ने अपने पत्र में इंदौर चिड़ियाघर और नगर निगम को मोती को Vantara स्थानांतरित करने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए। समिति का मानना है कि जामनगर स्थित यह केंद्र आधुनिक सुविधाओं, अनुभवी डॉक्टरों और बेहतर पर्यावरण से सुसज्जित है, जो वृद्ध हाथियों के पुनर्वास और देखभाल के लिए उपयुक्त स्थान है।
Vantara हाल के वर्षों में देश का सबसे बड़ा और आधुनिक पशु बचाव एवं पुनर्वास केंद्र बनकर उभरा है। यहां पशुओं की चिकित्सा, मानसिक स्वास्थ्य और प्राकृतिक आवास में पुनर्स्थापना पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
नगर निगम और चिड़ियाघर प्रशासन ने जताई आपत्ति
इंदौर नगर निगम आयुक्त दिलीप कुमार यादव ने कहा कि मोती को इंदौर के परिचित माहौल में ही रहना चाहिए, क्योंकि यही उसके स्वास्थ्य और मानसिक स्थिति के लिए बेहतर है।
“मोती की मानसिक स्थिति को देखते हुए उसे इंदौर चिड़ियाघर में ही रखना उचित होगा। हम उज्जैन से एक मादा हाथी लाने की योजना भी बना रहे हैं ताकि उसे साथी मिल सके,” यादव ने कहा।
वहीं, चिड़ियाघर प्रभारी डॉ. उत्तम यादव ने भी यही चिंता जताई कि मोती की शारीरिक और मानसिक हालत लंबी यात्रा के अनुकूल नहीं है।
“हमने मोती को एक ऐसा वातावरण दिया है जहाँ वह सुरक्षित और सहज महसूस करता है। उसे Vantara भेजना जोखिम भरा हो सकता है। हमारा हर निर्णय उसकी सुरक्षा और भलाई को ध्यान में रखकर लिया जाएगा,” उन्होंने कहा।
लगातार निगरानी में है हाथी मोती
कमला नेहरू प्राणी संग्रहालय के अधिकारियों ने बताया कि मोती की उम्र और व्यवहार दोनों को देखते हुए उस पर लगातार निगरानी रखी जाती है। वह कई बार आक्रामक भी हो जाता है, इसलिए उसकी देखरेख में एक विशेष टीम तैनात रहती है।
अधिकारियों का कहना है कि स्थानांतरण से उसकी मानसिक स्थिति और बिगड़ सकती है।
“मोती का घर यहीं इंदौर में है। उसे कहीं और भेजने से स्थिति सुधरने के बजाय और खराब हो सकती है,” एक अधिकारी ने कहा।
2023 का विवाद: जब मोती बना था सुर्खियों का हिस्सा
जुलाई 2023 में पशु अधिकार संगठनों Indore Animal Liberation और Federation of Indian Animal Protection Organisations (FIAPO) ने एक वीडियो जारी किया था जिसमें दावा किया गया था कि मोती को पिंजरे में रखा गया है और वह लंबे समय से अकेलेपन के कारण आक्रामक हो गया है।
यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही अंतरराष्ट्रीय पशु संरक्षण संगठन PETA (People for the Ethical Treatment of Animals) भी मोती के समर्थन में आ गया और उसे आज़ाद कर Vantara भेजने की मांग की।
हालांकि, 16 जुलाई 2023 को चिड़ियाघर प्रशासन ने एक पत्र जारी कर इन आरोपों को “झूठा और भ्रामक” बताया। प्रबंधन ने कहा कि वीडियो को एडिट किया गया था और यह दावा कि मोती को 31 साल से अकेले रखा गया है, बिल्कुल गलत है।
यह भी पढ़े: VANTARA ने अवैध तस्करी से बचाया गया ओरंगुटान: वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम
क्यों चर्चा में है Vantara
Vantara Rescue and Rehabilitation Centre, जामनगर में स्थित एक विश्वस्तरीय पशु बचाव और पुनर्वास केंद्र है। यहां हाथियों, शेरों और अन्य जंगली जानवरों की देखभाल के लिए अत्याधुनिक सुविधाएं हैं।
देशभर से कई हाथियों को यहाँ लाया गया है जिन्हें पहले सर्कस, मंदिरों या निजी स्वामित्व से बचाया गया था। Vantara में विशेषज्ञ डॉक्टर, प्रशिक्षित केयरटेकर्स और प्राकृतिक वातावरण इन जानवरों को नई जिंदगी देते हैं।
Vantara के समर्थकों का मानना है कि मोती के पुनर्वास के लिए यह सबसे उपयुक्त जगह है, जहाँ उसकी सेहत और मानसिक शांति दोनों बेहतर हो सकती हैं।
भावनात्मक जुड़ाव और पशु कल्याण के बीच संघर्ष
इंदौर के लोगों के लिए मोती सिर्फ एक हाथी नहीं, बल्कि शहर की पहचान का हिस्सा है। पीढ़ियों से लोग उसे देखने चिड़ियाघर आते रहे हैं, और अब उसके जाने की खबर से कई लोग भावनात्मक रूप से आहत हैं।
जहां एक ओर पशु अधिकार संगठन मोती को Vantara भेजने की मांग कर रहे हैं, वहीं स्थानीय प्रशासन का मानना है कि किसी भी निर्णय से पहले उसकी मानसिक और शारीरिक स्थिति को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
यह भी पढ़े: रॉयल बंगाल बाघिन ‘Bijli’ का Vantara एनिमल रेस्क्यू सेंटर में स्थानांतरण, उन्नत चिकित्सा के लिए
आगे क्या होगा मोती का?
वर्तमान में मामला विचाराधीन है। राज्य वन विभाग और पशु कल्याण समिति दोनों पक्षों — Vantara और इंदौर चिड़ियाघर — की रिपोर्ट की समीक्षा करने के बाद अंतिम निर्णय लेंगी।
तब तक मोती अपने परिचित वातावरण में, इंदौर चिड़ियाघर में ही रह रहा है, जहां वर्षों से उसके देखभाल करने वाले कर्मचारी उसके साथ हैं। चाहे वह इंदौर में रहे या Vantara जाए, मोती की कहानी भारत में बढ़ते पशु अधिकारों और संवेदनशील संरक्षण के संघर्ष का प्रतीक बन चुकी है।

